दोस्तों, भारत और पाकिस्तान की लड़ाई-झगड़े की कहानी कोई नई नहीं है। कभी बॉर्डर पर गोलियां, कभी LOC पर तनाव। लेकिन जब दोनों देश आपस में मिलकर गोलीबारी रोकने का वादा करते हैं, तो उसे कहते हैं सीजफायर समझौता।
क्यों ज़रूरी है ये? क्योंकि भाई, हर रोज़ फायरिंग में हमारे जवान और मासूम गांव वाले जान गंवाते हैं। ऐसे में अमन-चैन के लिए ऐसी डील होना बहुत ज़रूरी है। चलिए, आज इसे देसी और आसान भाषा में समझते हैं।
सीजफायर समझौता क्या होता है?
सीजफायर मतलब — लड़ाई रोकना। जब दो देश तय करते हैं कि अब बॉर्डर पर फायरिंग नहीं होगी, गोली नहीं चलेगी, तो उसे सीजफायर समझौता कहते हैं।
भारत और पाकिस्तान ने सबसे बड़ा समझौता 2003 में किया था। फिर 2021 में दोनों ने फिर से वादा किया कि बॉर्डर पर शांति रखेंगे।
देसी भाषा में समझो तो — जैसे दो मोहल्ले के लड़के झगड़ने के बाद बड़े-बुज़ुर्ग मिलकर फैसला करवा दें कि अब कोई लड़ाई नहीं करेगा। बस वैसा ही।
क्यों हुआ ये समझौता?
इससे क्या फायदा हुआ?
Extra Tips — S-400 से जुड़ी मजेदार बातें
निष्कर्ष (Conclusion)
तो दोस्तों, अब आप समझ गए होंगे कि भारत-पाक सीजफायर समझौता क्या होता है और क्यों ज़रूरी है। अगर आपको ये देसी स्टाइल में समझाना अच्छा लगा, तो कमेंट करके बताओ। और अगर किसी और टॉपिक पर ऐसे ही ब्लॉग चाहिए, तो बोलो — फटाफट बना देंगे।